बलिया: वरिष्ठ कोषाधिकारी आनंद दुबे ने पत्नी अर्चना के साथ मिलकर चैत्र नवरात्र के प्रथम दिवस पर मंदिर में पूजा अर्चना के बाद चंदन व आम का वृक्ष लगाकर किया वृक्षारोपण

 


बलिया: वरिष्ठ कोषाधिकारी आनंद दुबे ने पत्नी अर्चना और बेटे विराज द्विवेदी के साथ मिलकर चैत्र नवरात्र के प्रथम दिवस पर ट्रेजरी परिसर में स्थित मंदिर में पूजा अर्चना के बाद चंदन व आम का वृक्ष लगाकर किया वृक्षारोपण और समाज के हर तबके के लोगों को पर्यावरण संरक्षण का दिया अनोखा संदेश, ज्ञात हो कि पिछले दिनों श्री दुबे ने ट्रेजरी ऑफिस में स्थित पेंशनर वाटिका में पेंशनरों से वृक्ष गोंद लेने का आग्रह किया था जो पेंशनरों के बीच में क्रांति का संचार का काम किया जिसकी देन है कि सैंकड़ों की संख्या में पेंशनरों ने पेड़ों को गोंद लिए और औलाद की तरह पेड़ों की रखवाली करतें हैं। श्री दुबे ने चैत्र नवरात्र व हिन्दू नववर्ष की सभी को मंगल कामनाएं व हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए कहा कि मां,बहन,बेटियां देवी का रूप होती है, हमें बड़े आदर भाव से इनका मान सम्मान एवं सुरक्षा करनी चाहिए, साथ ही श्री दुबे ने प्रकृति के बारे में बोलते हुए कहा कि पेड़ प्राकृतिक की सुंदरता और पृथ्वी का गहना है, जिससे मानव जाति सहित संपूर्ण जीव-जंतुओं का पृथ्वी पर जीवन का आधार है, इस लिए हम सभी को सामूहिक जिम्मेदारी निभाते हुए प्राकृतिक का संरक्षण करना चाहिए,श्री दुबे ने कहा प्राकृतिक का संरक्षण व पेड़ लगाने से लगाने से हमें आशिर्वाद व दुवाएं मिलती है।

वहीं श्री दुबे की धर्मपत्नी श्रीमती अर्चना ने कहा कि पेड़ हमारे औलाद की तरह है,जिस तरह हम अपने बच्चों को बड़े प्यार और दुलार से पोसते पालते हैं वैसे ही हमें पेड़ पौधों से प्यार दुलार करना चाहिए, पेड़ हमें आक्सीजन देते हैं और आक्सीजन पृथ्वी पर जीवन का आधार है, इस लिए हमें सामूहिक जिम्मेदारी लेते हुए पेड़ों का संरक्षण करना चाहिए क्योंकि पृथ्वी पर पेड़ पौधें है तो प्रकृति है और प्रकृति से ही हमारा जीवन जुड़ा है,,आये हम सभी मिलकर एक पेड़ लगाएं और प्रकृति का संरक्षण कर अपने आने वाली भावी पीढ़ी के कल को सुरक्षित करना सुनिश्चित करें।

इस दौरान बड़ी सहज स्वभाव के डिप्टी कैशियर रामचन्द्र जी ने कहा कि हमारे वरिष्ठ कोषाधिकारी श्री आनंद दुबे जी हम सबके लिए प्रेरणादायक है, प्राकृतिक और पेड़ पौधों से श्री दुबे का खास लगाव उन्हें खास बनाता है, श्री रामचन्द्र ने कहा कि श्री दुबे ने पर्यावरण संरक्षण के प्रति हमारे पेंशनरों, कर्मचारियों और समाज में क्रांति का संचार किया है जो आने वाले समय में मील का पत्थर साबित होगा,श्री रामचन्द्र ने दोहे के माध्यम से कहा ''वृक्ष कबहुँ न फल भखै, नदी न संचय नीर। परमार्थ के कारने साधुन धरा शरीर।'' इस दोहे से हमें सीख लेकर जीवन में आगे बढ़ना चाहिए, इस दौरान सभी कर्मचारीगण व पेंशनर मौजूद रहे।

Comments

Popular posts from this blog

बलिया : चादर शरीफ की ज़ियारत, सूफीवाद के अमन-मोहब्बत के पैगाम के साथ शहर गूँजा

उत्तर प्रदेश स्टेट कबड्डी सब जूनियर के लिए बलिया की दो बालिकाएं चयनित

बलिया: श्री मुरली मनोहर टाउन स्नातकोत्तर महाविद्यालय में बीकॉम 6th सेमेस्टर की मौखिक परीक्षा 4 जून और 5 जून 2025 को होगी संपन्न हो।